मनुष्य जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताओं में से आवास का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। मनुष्य जीवन भर मेहनत-मशक्कत करने के उपरान्त एक छोटे से घरौंदे का निर्माण करता है। यह घर उसकी प्रतिष्ठा, उसका सम्मान होता है। सर्दी-गर्मी, धूप-छाँव, सुख-दुख, हर मौसम, हर स्थिति में यह घर उसको एक छत एक आसरा देता है, उसका सहारा बनता है। नए घर में ऐसी ही नई आशा और विश्वास के साथ वह अपना गृह निवेश करता है। किन्तु यह घर मात्र मनुष्य का ही नहीं अपितु अन्य कई जीव-जन्तुओं का ठिकाना बन जाता है। घरों में कॉकरोच, मच्छर, छिपकली जैसे न जाने कितने ही जीव अपने ठोर-ठिकाने बना लेते हैं और साथ लाते हैं बिमारीया और कई परेशानियाँ। ये जीव तो फिर भी अक्सर हमारी नजरों के सामने घूमते-फिरते दिखाई देते रहते हैं, किन्तु कुछ जीव तो ऐसे भी होते हैं जिनके पनपने के बाद भी हमें पता ही नहीं चलता कि ये हमारे घरोें में मौजूद भी हैं। ऐसा ही एक जीव है-दीमक। क्या है दीमक दीमक छोटे-छोटे कीट हैं जो घरों के पुराने दरवाजों, खिड़कियों या दीवारों के कोनों में देखने को मिलती है और लकड़ी और लकड़ी की बनी चीजें ...